एक छोटी सी कविता भी हुकूमत के लिए खतरा बनती है : गौहर रजा

ग्वालियर। प्रसिद्ध कवि, लेखक, रचनाकार गौहर रज़ा ने रविवार को कहा कि छोटी सी कविता और लेख भी हुकूमत के लिए खतरा बनता है और यह बात हुकूमत अच्छी तरह से जानती है। इस संदर्भ में उन्होंने नाजी जर्मनी के समय के कवि पास्टर निमोलर और फैज अहमद फैज की हम देखेंगे नज़्म का उदाहरण दिया।

रज़ा पिछली करीब चौथाई सदी से बिना किसी व्यवधान के हर वर्ष 26 जुलाई को होने वाले साहित्यिक कार्यक्रम जनकवि मुकुट बिहारी सरोज सम्मान समारोह में बोल रहे थे। इस साल जनकवि की जन्मशताब्दी वर्ष में सरोज सम्मान 2026 से रज़ा को अभिनंदित किया गया। अनेक किताबों के लेखक, फिल्मकार तथा पेशे से वैज्ञानिक गौहर रज़ा मूलतः अलीगढ़ के हैं और देश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में योगदान देने के बाद इन दिनों में दिल्ली में रहकर सृजन के काम में जुटे हैं ।

सम्मानित होने के बाद बोलते हुए गौहर रज़ा ने कहा कि मुल्क एक ऐसे दौर से गुजर रहा जब पिछली पीढ़ियों के ख्वाब बिखर रहे हैं । ऐसे मे सरोज जी जैसे पहले के और आज के साहित्यकारों ने रास्ता दिखाया है और यही कविता का काम है।

उन्होंने कहा कि यदि संघर्ष की राह पर चलना है तो अपने कलाकारों को याद करना बहुत जरूरी हैं। इसके लिए सरोज न्यास को उन्होंने बधाई दी।

प्रसिद्ध रचनाकार तथा सरोज सम्मान 2024 से अभिनंदित यश मालवीय (इलाहाबाद) की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन में शुरुआत में जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति न्यास की सचिव मान्यता सरोज ने बताया कि यह सम्मान मठों, सरकारों, पूँजी संस्थानों द्वारा जानबूझकर उपेक्षित किये गए गए, मानवता, जनता और देश के हित के मुद्दे उठाकर, जो है उसे बेहतर बनाने की दिशा दिखाने वाले रचनाकारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए दिया जाता है।

अब तक इससे 23 कवियों, साहित्यकारों को अभिनंदित किया जा चुका है। सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

समारोह में ग्वालियर के वरिष्ठ गीतकार मोहन अम्बर जी के गीतों पर केन्द्रित डॉ भगवान् स्वरूप शर्मा चैतन्य द्वारा संपादित लोकमंगल के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर उनके पुत्र शिवदान सिंह गहलोत, रविदान सिंह गहलोत भी उपस्थित थे।

समारोह के दूसरे सत्र में आमंत्रित कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, जिनमें रज़ा के अलावा यश मालवीय, मालिनी गौतम, मंजुल मयंक, महेंद्र मिहोनवी, शेफाली शर्मा और न्यास के अध्यक्ष महेश कटारे भी शामिल थे।

2005 से लगातार दिए जा रहे सरोज सामान से सबसे पहले अभिनंदित किये गए थे अपनी विधा के अनोखे और बुंदेली के असाधारण कवि आदरणीय सीता किशोर खरे – उनके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ वह लगातार बिना किसी चूक या विराम के लगातार जारी है ।

खरे जी के बाद निर्मला पुतुल, निदा फ़ाज़ली, कृष्ण बक्षी, अदम गौंडवी, उदय प्रताप सिंह, नरेश सक्सेना, राजेश जोशी, डॉ. सविता सिंह, राम अधीर, प्रकाश दीक्षित, कात्यायनी, महेश कटारे ‘सुगम’, शुभा और मनमोहन, मालिनी गौतम, विष्णु नागर, जसिंता केरकट्टा, देवेन्द्र आर्य, कविता कर्मकार, यश मालवीय तथा आरती को जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति सम्मान से अभिनंदित किया जा चुका है।

(तन्मय धर की रिपोर्ट) 

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